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सनसनी :- कोल वॉशरिज बनी है कोयला चोरी का अड्डा, इंडो युनिक कोल वॉशरी निशाणेपर.

केपिसिएल को घटिया कोयला आपूर्ति करनेवाले किशोर अग्रवाल पर क्यूं नही हों रही कारवाई, कौनसे नेताओंका है सपोर्ट ?

कोल वॉशरिज का झोल पार्ट-3

इन दिनों अगर कही भ्रष्टाचार चरमपर है तो उसमे पाहिला नाम आयेगा तो सिर्फ कोयला चोरी का , क्योंकि इस कोयला व्यापार मे हररोज करोडोके घपले होते है, वेकोलि से निकले कोयले को जहाँ कोल वॉशरिज मे धुलाई के लिये भेजा जाता है वही दुसरी ओर वहाँ पर कोयला धुलाई के नामपर कोयले मे मिलावट कर उसे पॉवर प्लांट मे भेजा जाता है. इसतरह चंद्रपुर, वणी,माजरी,बल्लारपूर और वणी नार्थ एरिया के कोयला खदानों से निकले कोयले की धांधली का गोरखधंधा जोरोपर शुरू है, खास बात यह है की चंद्रपूर और यवतमाल जिल्हेमे स्थित कोल वॉशरिज कोयला चोरी के अड्डे बने हुये है.

घुग्गुस वणी रोडपर स्थित इंडो युनिक कोल वॉशरी इन दिनों कोयला चोरी के बारेमे सुर्खिया मे है क्योकि इस कंपनी मे आनेवाले कोयला पुलिस प्रशासन द्वारा पकडा गया था और इस कंपनी को ताला भी जडा दिया था, इस वॉशरिज मे उच्च दर्जेके कोयले मे पॉवर प्लांट की वेस्टेज चुरीभरी राख, कोयला चुरी और स्पंज आयर्न का वेस्टेज मटेरिअल मिलाकर संबंधित पॉवर प्लांट को भेजा जा रहा है. इस इंडो कोल वॉशरिज के किशोर अग्रवाल अँड कंपनी को केपिसिएल को कोयला सप्लाय का टेंडर मिला है उस केपिसिएल को इस प्रकार का मिलावटी और घटिया कोयला भेजा जा रहा है और इस सौदेमे केपिसिएल कंपनीके चेअरमन और आला अधिकारी और इस इंडो कोल वॉशरिज के किशोर अग्रवाल अँड कंपनी का बडा डील होने की खबर है. मतलब साफ है की जब इंडो कोल वॉशरी को ताला जड दिया गया तो फिर किशोर अग्रवाल अँड कंपनीपर कारवाई होनेके बावजूद कंपनीका ताला खुला कैसा ? इस खेल मे वह कौन नेता है जिनके दबाव मे कोल वॉशरी सुरू हूयी है यह जानना बेहद जरूरी है.

वेकोलि कोयला खदान से ऊंच्च दर्जे का कोयला सीधे सबंधित पॉवर प्लांट कंपनी में जाने की बजाए निजी स्थान पर उतार कर उसके बदले घटिया और मिलावटी कोयला सप्लाई किया जा रहा है और दर्जेदार अच्छा कोयला निजी बाजार में अधिक दामों में बेचा जा रहा है। इस गोरखधंधे में ट्रांसपोर्टरों और कंपनी के लोगों की मिलीभगत है। इस प्रकार से हर महीने करोडो के कोयला का घोटाला और हेराफेरी कोयला कारोबारी और संबंधित पॉवर प्लांट कंपनी के लोग कर रहे है.

कैसे होती है कोयले की हेराफेरी ?

वेकोलि के विभिन्न खदानों से उद्योगों को भेजा जा रहा कोयला उद्योगों में भेजे जाने के पहले निजी प्लाटों पर खाली कर घटिया दर्जे का कोयला जिसमें (चार फाइन) राख, सेल पत्थर, फ्लाय ऐश मिलाकर संबंधित उद्योगों को भेजा रहा है, जबकि खदानों के उच्च दर्जे के कोयलों को वणी तथा चंद्रपुर के कोयला मार्केट में ऊंचे दामों पर बेचा जा रहा है. ऐसेमे इंडो कोल वॉशरिज का उच्च दर्जेका कोयला वणी चंद्रपूर के व्यापारी को बडे दामोपर बेंचा जा रहा है.

शातिर नेताओं, अधिकारियों, कोयला व्यापारियों का सिंडिकेट

जैसे कि प्रक्रिया चली आ रही है, वेकोलि की खदानों से निकाला गया लाखों टन कोयला वॉशरियों से होकर महाजेनको को अनुदान पर दिया जाता है। कुछ साल पहले तक वेकोलि की खदानों से निकाला गया कोयला सीधे महाजेनको की बिजली उत्पादन इकाइयों को भेज दिया जाता था, इसमें वॉशरियों का कोई रोल ही नहीं था जिससे कोयले में किसी तरह की मिलावट या चोरी की कोई गुंजाइश ही नहीं थी, इस पुरानी व्यवस्था में किसी को भी को अतिरिक्त लाभ की कोई संभावना नहीं थी और पूरा फायदा आम उपभोक्ताओं तक पहुंचता था क्योंकि बिजली सस्ती थी लेकिन कुछ शातिर किस्म के नेताओं, सरकारी अधिकारियों और कोयले के व्यापारियों ने मिलीभगत करके एक चाल चली और इस ‘सिंडीकेट द्वारा बताया गया कि बिजली परियोजनाओं तक बगैर धोए सीधे पहुंचनेवाला कोयला पर्यावरण के लिहाज से खतरनाक है और यह प्रदूषण फैलाता है,और इसी कडी को जोडते हुये प्रदूषण नियंत्रण करने के नाम पर कोयले की धुलाई को प्रक्रिया में शामिल किया गया, महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल (एमपीसीबी) ने कोयले की ढुलाई और धुलाई के लिए वर्ष 2019 में एक टैंडर जारी किया। 2019 में महाराष्ट्र में तत्कालीन सत्ताधारियों ने अपने-अपने करीबियों को कोयले की धुलाई के लिए वॉशरी का टेडर दिलवाया, इसके कुछ महीनों बाद राज्य में चुनाव हुए और नई पार्टियों की सत्ता बनीऔर फिर उलटफेर होकर फिर वही भाजप प्रणीत सरकार सत्ता मे आयी और अभी खुलेआम कोल वॉशरी मे घटिया कोयला सरकारी पॉवर प्रोजेक्ट को दिया जा रहा है जिसमें करोडो का घोटाला हों रहा लेकिन भ्रष्ट नेताओके सिंडिकेट प्रयास से यह सिलसिला जारी है.

 

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